मुसलमान जानवरों की कुर्बानी क्यों देते हैं?

मुस्लिम धर्म के लोग अल्लाह की रज़ा के लिए कुर्बानी करते हैं, हालांकि इस्लाम में सिर्फ हलाल तरीके से कमाए हुए पैसों से ही कुर्बानी जायज मानी जाती है, इसमें बकरा, भेड़ या ऊंट वगैरा जानवर की कुर्बानी दी जाती है, कुर्बानी के वक्त ध्यान रखना होता है कि जानवर को चोट ना लगी हो और वो बीमार भी ना हो।

इस्लाम में कुर्बानी का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है, कुरान में लिखा है एक बार अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेनी चाही, तो उन्होंने हजरत इब्राहिम को हुक्म दिया कि वह अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान कर दें। हजरत इब्राहिम को उनके बेटे हजरत ईस्माइल सबसे ज्यादा प्यारे थे, अल्लाह के हुक्म के बाद हजरत इब्राहिम ने ये बात अपने बेटे हजरत ईस्माइल को बताई। बता दें, हजरत इब्राहिम को 80 साल की ज़्यादा की उम्र में औलाद नसीब हुई थी,जिसके बाद उनके लिए अपने बेटे की कुर्बानी देना बेहद मुश्किल काम था।

लेकिन हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के हुक्म और बेटे की मुहब्बत में से अल्लाह के हुक्म को चुनते हुए बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया।हजरत इब्राहिम ने अल्लाह का नाम लेते हुए अपने बेटे के गले पर छुरी चला दी, लेकिन जब उन्होंने अपनी आंख खोली तो देखा कि उनका बेटा बगल में जिंदा खड़ा है और उसकी जगह दुमबा कटा हुआ लेटा हुआ है, जिसके बाद अल्लाह की राह में कुर्बानी देने की शुरुआत हुई।

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