तीन तलाक के बाद अब इस कानून को भी खत्म करने के लिए मुस्लिम महिला ने खटखटाया…

 

तलाक ए बिदअत (तीन तलाक) को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद से ही सरकार द्वारा कानून बना कर असंवैधानिक बना दिया गया है,लेकिन पिछ्ले 17 जून को सर्वोच्च न्यायालय मे तलाक को लेकर एक नई बहस छिड़ गई और 5 जजो की बेंच ने तलाक ए हसन (1 तलाक) के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई की,वही खबर है कि मायानगरी मुंबई की एक और महिला ने इस मामले मे याचिका दायर की है।

मुंबई की इस महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुवे जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने दिल्ली पुलिस के साथ साथ उस मुस्लिम व्यक्ति से जवाब मांगा जिसकी पत्नी ने तलाक ए हसन के नोटिस को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है,महिला की मानें तो उसके पति ने 1 तलाक का नोटिस जारी कर उसके अधिकारो को चोट पहुँचाई है इसलिये तलाक ए हसन को भी असंवैधानिक करार दिया जाये।

याचिकाकर्ता बेनज़ीर हीना ने तलाक के इस्लामी रूप तलाक ए हसन को असंवैधानिक घोषित करने के लिए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से एक याचिका दायर की, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन करता है. हिना ने कोर्ट से गुहार लगाई  कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937 की धारा 2, जो मुसलमानों को एकतरफा तलाक का अभ्यास करने की अनुमति देती है, को खत्म कर देना चाहिए।

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