जेल में रहते साथी कैदी के लिए मसीहा बने मौलाना कलीम सिद्दिक़ी, उम्र कैद की सज़ा ..

धर्मांतरण के आरोपो से घिरे इस्लामिक स्कालर मौलाना कलीम सिद्दिकी लगभग 10 महीनो से लखनऊ जेल मे बन्द हैं,प्रदेश की अलग अलग अदालतो मे मौलाना पर कई मुकदमे दर्ज हैं,लेकिन खुद जेल मे रहते हुवे मौलाना कलीम सिद्दिकी अपने साथी कैदी के लिये मसीहा बन गये है,खबर है कि मौलाना ने अपने बैरक मे उम्र कैद की सज़ा काट रहे एक युवक को रिहा कराने मे कानूनी एवं वित्तीय सहायता दी है जिसे 27 जुलाई को रिहा कर दिया गया।

मौलाना कलीम सिद्दिकी से जुड़े मामलो की पैरवी कर रहे मौलाना ओसामा नदवी एडवोकेट ने बताया कि मौलाना कलीम सिद्दिकी साहब जब लखनऊ जेल पहुंचे तो वहां उनके बैरक मे एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति मिला धीरे धीरे जब बात चीत बढ़ी तो पता चला कि उसका नाम मोहम्मद रईस है और वो पूर्वांचल से है,उसने बताया कि उसे उम्र कैद की सज़ा मिली है और वो लगभग 16 सालों से जेल मे बन्द है,उसकी पैरवी करने वाला कोई नही है,जो उस से मुलाकात करे और अदालत मे रिहाई के लिये उसकी पैरवी करे,मौलाना ने उसी समय वादा किया कि हम तुम्हे बाहर निकलवाते है।

ओसामा नदवी ने बताया कि उसके बाद जब भी केस के सिलसिले मे मौलाना से मुलाकात हुवी तो मौलाना ने एक ही बात कही कि मेरे लिये दुनिया की अदालत मे नही बल्कि अल्लाह की अदालत मे अर्ज़ी दाखिल करना लेकिन हम तुम्हे वकील उस दिन मानेंगे जब तुम हमारे साथी को रिहा करवा दोगे,ओसामा नदवी ने अपने साथी वकीलो की सलाह मशवरा के बाद मोहम्मद रईस के मामले मे ज़मानत की अर्ज़ी दाखिल की और जज के यहां अर्ज़ी मनज़ूर हो गई और ज़मानत का आदेश भी मिल गया,लेकिन फाइलो के गायब होने की वजह से रईस को अपनी रिहाई के लिये लगभग 1 महीने का इंतज़ार करना पड़ा,आखिर 27 जुलाई की सुबह रईस को लखनऊ जेल से रिहा कर दिया गया।

ओसामा नदवी ने बताया कि मौलाना कलीम सिद्दिकी ने उनका नंबर रईस को देकर भेजा था इसलिये रईस ने रिहा होते ही उन्हे फोन किया,और बताया कि मौलाना का हुक्म है कि आप मुझे गेट से रिसीव कर बस पर बैठा दें,ओसामा नदवी तेज़ी से जेल पहुंचे और रईस को रिसीव कर उन्हे खाना खिलाया और फिर उन्हे बस का किराया और ज़रूरी चीजें देकर घर की तरफ रवाना किया।

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