वो मौलाना जिसने 1857 मे अंग्रेज़ो के दांत खट्टे कर दिये लेकिन हिंदू राजा जग्गनाथ ने…

 

शाहजहाँपुर के राजा जग्गानाथ सिंह ने अगर 1857 की जंग ए आज़ादी मे गद्दारी ने की होती तो शायद अवध के इलाके पर अंग्रेज़ो का कब्ज़ा करना नामुमकिन हो जाता,जिस मौलाना ने अंग्रेज़ो के दात खट्टे कर दिये थे उन्हे अंग्रेज़ो ने राजा को महज़ 50 हजार की लालच देकर धोखे से शहीद करवा दिया हम बात कर रहे हैं मौलाना अहमदुल्लाह शाह की जिनका जन्म 1787 मे दक्षिण भारत के विजगापट्टन मे हुवा था,आप फैज़ाबाद के मौलवी के नाम से मशहूर थे,1857 की क्रांति मे अहमदुल्लाह शाह का नाम प्रमुख रूप से शामिल था।

मौलाना अहमदुल्लाह शाह का मानना था कि सशस्त्र विद्रोह के लिये लोगो का सहयोग मिलना ज़रूरी है इसलिये आप ने दिल्ली मेरठ पटना कोलकाता समेत अन्य स्थानो की यात्रा की और आज़ादी की जंग के लिये लोगो को उभारा
अंग्रेज़ अधिकारी एवं लेखक जीबी माल्सन के मुताबिक 1857 के विद्रोह के पीछे मौलाना अहमदल्लाह का दिमाग और और उनकी कोशिशे महत्वपूर्ण थी,जीबी माल्सन के अनुसार विद्रोह की तैयारी मे मौलाना पटना पहुंचे तो उन्हे गिरफ्तार कर लिया गया और फिर बगावत करने के आरोप मे फांसी की सज़ा सुनाई गई,जिसे बाद मे उम्र कैद मे तब्दील कर दिया गया,इसी बीच 10 मई 1857 को विद्रोह हुवा और जौनपुर एवं बनारस के विद्रोहियों ने 7 जून को पटना पर हमला कर अपने कब्ज़े मे ले लिया इसी बीच पटना जेल मे बन्द मौलाना को रिहा कराया गया,मानसिंह को पटना का राजा नियुक्त कर मौलाना अवध वापस आगये।

अवध मे मौलाना ने विद्रोही फौज का नेतृत्व किया और चिनहट मे अंग्रेज़ो से लड़ाई लड़ी और लखनऊ को अंग्रेज़ो से मुक्त करा लिया,1 साल बाद अंग्रेज़ो ने लखनऊ पर फिर से आक्रमण किया इस बार बेगम हज़रत महल ने फौज का नेतृत्व किया लेकिन उन्हे हार का सामना करना पड़ा और लखनऊ एक बार फिर अंग्रेज़ो के कब्ज़े मे चला गया,इसके बाद मौलाना ने शाहजहाँपुर का रुख किया यहां अंग्रेज़ो के कमांडर कॉलिन कैम्पबेल ने हमला किया रात भर लड़ाई चली लेकिन अंग्रेज़ नाकाम रहे,और उन्हे पीछे हटना पड़ा,लेकिन कुछ ही दिनो बाद अंग्रेज़ो ने एक बार फिर से हमला किया और शाहजहाँपुर को अपने नियन्त्रण मे ले लिया,मौलाना ने शाहजहाँपुर छोड़ दिया कॉलिन कैम्पबेल ने मौलाना का पीछा किया लेकिन पकड़ने मे नाकाम रहा।

शाजहाँपर से निकलकर मौलाना उत्तर दिशा मे 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पोवायां पहुंचे तभी अंग्रेज़ो ने मौलाना को ज़िन्दा या मुर्दा पकड़ने वाले को 50 हजार चांदी के सिक्के देने का एलान कर दिया,इसी बीच पोवाया के राजा जग्गानाथ सिंह ने मौलाना को अंग्रेज़ो के खिलाफ विद्रोह की तैयारी करने के लिये बुलाया मौलाना जैसे ही महल के दरवाज़े पर पहुंचे राजा ने तोप के गोले से हमला करा कर शाहीद कर दिया।

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